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आसाराम बापू का बयान: सर्दी के मौसम में निकली बेवकूफी वाली भाप

Posted January 16, 2013 @ 16:15 pm
by Abhinav Chandel

पिछले कुछ दिनों में जहाँ दिल्ली गैंग-रेप हादसे की वजह से भारत ने एक बार फिर महिलाओं की तरफ अपने रवैये का आंकलन किया, वहीं दूसरी ओर खुद को समाज का प्रमुख अंग मानने वाले नेताओं और बाबाओं की असलियत भी उनके मुंह के रास्ते सामने आई। इन्ही में से एक नाम आसाराम बापू का भी है। यूँ तो आपने कई बार अपने टीवी पर आसाराम बापू को देख अपना सर पीटा होगा, पर इस बार बात सिर्फ अटपटे प्रवचनों की ही नहीं थी।

आसाराम बापू का बयान: सर्दी के मौसम में निकली बेवकूफी वाली भाप

 

"गैंग-रेप हादसे में गलती उस लड़की की भी थी।" "उस लड़की को उन अपराधियों को भैया कह कर बुलाना

 

चाहिए था। धर्म का नाम लेना चाहिए था।"

 

काश लोगों ने कभी इंडिया गेट के सामने आस्था जैसे चैनल का विरोध किया होता तो शायद आज यह दिन

 

देखना नहीं पड़ता। आसाराम बापू शायद यह भूल गए थे, की जब द्रौपदी का चीर हरण हुआ था, तब भाई

 

और अनेक प्रकार के शब्दों का प्रयोग हुआ था, पर बावजूद इसके दुर्योधन न रुका और भगवान् कृष्ण ने

 

बयानबाजी करने की बजाये द्रौपदी की रक्षा करना सही समझा था। तो पहले ही कदम पर, आसाराम बापू ने

 

खुद का 'गॉडमैन' होना गलत साबित कर दिया। शायद फिरंगियों को अनेक आसन सिखाते सिखाते, वह मौन

 

आसन का अभ्यास करना भूल गए।

 

हालाँकि, आसाराम बापू अकेले नहीं हैं, जिनके मुंह से इन सर्दी के दिनों में भाप के संग संग उनकी बेवकूफी

 

का प्रमाण निकला हो। मोहन भागवत, जोकि अपने किसी अलग ही भारत में खोये हुए हैं, कहते हुए पाए गए

 

की औरतों का काम है घर में रहना, न की बाहर घूमना। काश, कोई उनके बाहर घुमने पर पाबन्दी लगा दे, तो

 

कमसे कम हम उनके उलजलूल इंटरव्यू से तो बचेंगे।

 

वहीं बीजेपी के एक नेता ने बेवकूफी की हर लक्ष्मण रेखा पार करते हुए कहा, "की जब औरतें लक्ष्मण रेखा

 

पार करती हैं, तो रावण उनके साथ यही करेंगे।"

 

वहीं अबू आज़मी ने शायद तालिबान का कुछ पुराना उधार चुकता करना है, उनका बयान की औरतों को मर्दों

 

के बिना बाहर नहीं जाना चाहिए यही साबित करता है। काश, अबू आज़मी साहब घर से मुंह पर ताल लगाये

 

बिना बाहर न निकलें।

 

खैर, दिल्ली गैंग-रेप हादसे से एक बात तो साबित हो गयी, की हमारी लडाई सिर्फ रेपिस्ट से नहीं, बल्कि

 

एक पिछड़ी हुई मानसिकता से है। और ये मानसिकता जब तक बेवकूफी की हर लक्ष्मण रेखा पार करेगी,

 

जब तक खयाली-भारत बुनेगी या रेप रोकने के उलटे सीधे तर्क देगी, तब तक हम बस भगवान और खुद

 

को 'गॉडमैन' कहने वालों के भरोसे ही हैं।

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