काई पो छे - दोस्ती की एक नयी परिभाषा
Posted On 22nd February, 2013 @ 11:05 am by MTV EDITOR

इंसानी रिश्तों में से सबसे खूबसूरत रिश्ता दोस्ती का होता है, और इसी रिश्ते पर रौशनी डालती अभिषेक कपूर की 'काई पो छे' शायद इस साल की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक होने वाली है।

अमित त्रिवेदी के जादू ने पहले ही इस फिल्म के गानों को नंबर एक पर ला खड़ा किया था, पर ज़बरदस्त ढंग से हुए प्रमोशन के चलते ये फिल्म दर्शकों को भी सिनेमाघरों की तरफ खूब खींचेगी। पर सबसे ख़ास बात फिल्म की कहानी है, जो चेतन भगत की '3 मिस्टेक्स ऑफ़ माय लाइफ' किताब पर आधारित है, और ये किताब पहले ही युवाओं को खूब लुभा चुकी है। गौरतलब है की अभिषेक कपूर की पिछली फिल्म रॉक ओन ने अच्छी खासी सफलता हासिल करी थी बॉक्स ऑफिस पर।

फिल्म की कहानी 2000 दशक के शुरुआती सालों की है, जब गुजरात राजनीती और भूकंप के झटकों से जूझ रहा था। कहानी की शुरुआत होती है तीन दोस्तों से, गोविन्द, ईशान और ओमी जो अपना एक खुद का छोटा स्टोर शुरू करते हैं। और उनकी किस्मत तब पलटना चालू होती है जब उनकी मुलाकात एक मुसलमान लड़के, अली, से होती है, जिसमे क्रिकेट का अगला चमकता सितारा बनने की काबिलियत है।

जहाँ ईशान उस लड़के को खुद से क्रिकेट की शिक्षा देने की ठानता है, वहीं गोविन्द ईशान की बहन से चोरी छुपे प्यार करने लगता है और साथ ही ओमी भी राजनीती के छेत्र में अपने कदम बढ़ने लगता है। जहाँ 2001 का भूकंप से उनकी ज़िन्दगी उभर रही होती है, वहीँ 2002 के दंगे एक बार फिर भरी उथल-पुथल मचा जाते हैं। और इन्ही मुश्किलों से गुज़रती-उभरती दोस्ती की कहानी है 'काई पो छे'।

दमदार अभिनय से भरी दो घंटे लम्बी 'काई पो छे' बॉलीवुड में एक नयी आशा की किरण छोड़ जाती है और फिल्म में किसी भी बड़े कलाकार की कमी नहीं खलती। सुशांत सिंह राजपूत और अमित साध ने जहां दोस्ती की नयी परिभाषा कायम करी, वहीं इनके तीसरे दोस्त की भूमिका में दिखे राज कुमार यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया की धीरे ही सही, पर आखिर वह बॉलीवुड जगत में अपने कदम जमा रहे हैं। राज कुमार यादव ने एक बार फिर अपने अभिनय का लोहा मनवाया और बाकी सभी कलाकारों से आगे रहे। वहीं एक छोटी भूमिका में दिखीं अमृता पूरी कहानी में थोड़ा गुम हो गयीं।

'काई पो छे' के लिए सबसा बड़ा श्रेय जाता है अभिषेक कपूर को, जिन्होंने एक किताबी कहानी होने के बवाजूब फिल्म को ज्यादा लम्बा नहीं खींचा और अंत तक रोमांच बनाये रखा। 'काई पो छे' उन कुछेक फिल्मों में से एक है, जो न केवल दर्शकों को लुभाएगी पर आलोचकों की भी तारीफें खूब बटोरेगी।

रेटिंग: 4/5

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